'ओ डैनी ब्वॉय' है प्रदीप सिंह जी के ‘आवारा नोट्स’ का एक गुच्छा - उनकी पहली पुस्तक जो उनके अनूठे लेखन का आनंद-आस्वाद लिए है ।ये संस्मरण जैसी सच्ची कहानियाँ ‘पेट की डॉक्टरी’ से लेकर 'सर्वहारा स्वर्ग की एक झलक' तक देश विदेश की दिलचस्प झलकियाँ दिखाती हैं ।
यह उस ‘बिगड़ैल लड़के' की कहानी है जिसने ‘आपातकाल’ में एक लम्बा समय जेल में काटा, जिसके जीवन में 'जिन और टॉनिक' और विचित्र 'चिरागों का सिलसिला' जुड़ गया ।
इन्हीं कथाओं के बीच फैली सुगंध है - 'आवारा नोट्स' की - जो प्रदीप सिंह का अपना कहन - अपनी विधा है ।और फिर वह - 'ओ डैनी ब्वॉय' जो इस पुस्तक की भी ‘आत्मा के कोटर’ में बैठा है, जहाँ पहुंचते हुए आँखें दूर अनजाने देश के 'डैनी ब्वॉय' की प्रतीक्षा करते पिता के आँसुओं से भींग जाती हैं ।
“उनकी अभिव्यक्ति में सच की वह खनक है जिसके अभाव में हमारी अधिकांश साहित्यिक कारसाजियाँ मूँगफली के छिलकों की तरह व्यर्थ प्रतीत होती हैं। प्रदीप सिंह इस अर्थ में एक 'डिमांडिंग' लेखक भी हैं कि उनके पाठक को उनकी शैली के व्यंग्य और सूक्ष्म अर्थसंकेतों को पकड़ने के लिये सतर्क रहना पड़ता है।”
- आशुतोष दुबे
प्रदीप सिंह
भभुआ, बिहार से प्रारंभ करके काशी हिंदू विश्वविद्यालय से चिकित्सा विज्ञान तक की शिक्षा। आपातकाल के दौरान सत्याग्रह। आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत लंबा कारावास। लम्बे समय तक ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस में कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरॉलाजिस्ट के पद पर काम करने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति। साहित्य, कला और राजनीति में गहरी रुचि। प्रकृति और संस्कृति का आस्वादन लेते हुए यात्राएं करने और पढ़ने-लिखने और संवाद करने में आनंद।
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